भूत भगाने के उपाय मंत्र

भूत भगाने के उपाय मंत्र


भूत भगाने के उपाय मंत्र, इंसान के जीवन में आने वाली विभिन्न समस्याओं में एक किस्म की समस्या भूत-प्रेत, चुडैल, जिन्न या दूसरी अदृश्य ताकतों के दुष्प्रभाव भी है। यह सदियों से लोगों को भयभीत करती हुई हैरत में डालती आई हैं।

इसकी चपेट में कोई भी आ सकता है, लेकिन सामान्य तौर पर युवक, कुंवारी युवतियां, किशोर, नव विवाहिताएं, गर्भवती औरतें और बच्चें इससी चपेट में आ जाते हैं। अजीबो-गरीब हरकतों और बाॅडी लैंग्वेज में आए अचानक बदलावों से पहचाने जाते हैं।

भूत भगाने के उपाय मंत्र

इसे सामान्य बोलचाल की भाषा में ऊपरी हवा का असर कहते हैं। ये एकतरह से पैशाचिक शक्तियां होती हैं, जो हमारी सकारात्मक ऊर्जा को नकारत्मक बनाकर पीड़ित को शक्तिहीन बनाने का प्रयत्न करती हैं।

कई बार देखा जाता है कि अचानक खुले में शौच आदि के लिए जाने वाला व्यक्ति के आते ही तबीयत बिगड़ जाती है। उसपर दबाएं बेअसर हो जाती हैं। इनसे बचने के उपाय हो न हों, लेकिन ज्योतिष विज्ञान, वैदिक अनुष्ठान, तंत्र-मंत्र की साधनाएं और टोने-टोटके से भूत भगाने के कई उपाए बताए गए हैं।

भूत भगाने का हरण मंत्र
इसके प्रयोग से व्यक्ति चाहे जिस भी तरह की प्रेत-बाधा की चपेट में हो उसे छुटकारा मिलती है। नीचे दिया गया यह मंत्र कठिन होने के साथ ही लंबा भी है। जबकि इसके विधिवत अनुष्ठान के दौरान विधिवत जाप करने से इसका असर अचूक होता है। स्फटिक की माला से 108 बार इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

इस दौरान कोई रूकावट नहीं आनी चाहिए। इसके द्वारा पीने के साफ पानी का को अभिमंत्रित किया जाता है। बाद में उसमें से एक तिहाई पीड़ित को पिला दिया जाता है और बाकी पानी से पूरे घर में छींटे मारें जाते हैं, जिनसे समस्त ऊपरी बाधा से मुक्ति मिल जाती है। मंत्र इस प्रकार है-

ऊँ ऐं हीं श्रीं हीं हूं हैं ऊँ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय

भूत-प्रेत पिशाच-शाकिनी-डाकिनी यक्षणी-पूतना-मारी-महामारी,

यक्ष राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षसादिकम क्षणेन हन हन भंजय भंजय मारय मारय

शिक्षय शिक्षय महामारेश्रवर रूद्रावतार हुं फट स्वाहा।

दस हजार बार मंत्र जाप

ऊपर दिए गए लंबे मंत्र की तरह यह भी लंबा है, लेकिन उच्चारण में सरल है। वह इस प्रकार है-

तेल नीर, तेल पसार चैरासी सहस्र डाकिनीर छेल,

एते लरेभार मुइ तेल पडिया देय अमुकार (नाम)

अंगे अमुकार (नाम) भार आडदन शूले यक्ष्या-यक्षिणी,

दैत्या-दैत्यानी, भूता-भूतिनी, दानव-दानिवी, नीशा चैरा शुचि-मुखा

गारुड तलनम वार भाषइ, लाडि भोजाइ आमि पिशाचि अमुकार (नाम)

अंगेया, काल जटार माथा खा ह्रीं फट स्वाहा।

सिद्धि गुरुर चरण राडिर कालिकार आज्ञा।

इसके जाप में सात या 11 दिन का समय लग सकता है। सर्वप्रथम किसी शुभ मुहूर्त में मंत्र जाप साधना की शुरूआत करनी चाहिए। कुल जाप संख्या 10 हजार को उसके अनुरूप विभाजित कर लेना चाहिए। साधना के समय सामान्य पूजन सामग्री के साथ एक कटोरी में सरसो तेल भी रखें।

साधना के अंतिम दिन लेकर 11 बार इसी मंत्र का जाप के साथ फूँक मारें। इस तरह से यह तेल अभिमंत्रित हो जाएगा। इसकी कुछ बूंदें पीड़ित के ऊपर छिड़क दें या फिर उसके सिर में मल दें। बचे तेल को संभाल कर रखें और प्रतिदिन पीडित व्यक्ति के स्नान के बाद पहले वही तेल 11 दिनों तक प्रयोग में लाएं।

हनुमत मंत्र –

प्रेत बाधा दूर करने से लेकर उसे भगाए रखने के लिए हनुमत मत्रं का एक छोटा हिस्सा भी बहुत उपयोगी साबित होता है। वह है-ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ऊँ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय! इस हनुमान मंत्र का पांच बार जाप करने से भूत कभी भी निकट नहीं आ सकता है।

कुछ टोटके से उपाय– भूत भागने के कुछ सामान्य टोटके भी काफी कारगर होते हैं। इससे पहले भूत के प्रकार और असर का पता लगाना जरूरी होता है।

भूत या प्रेत बाधा दूर करने के लिए सबसे पहले शुक्ल पक्ष में किसी भी शनिवार की रात को पीपल की जड़ को अपने यहां आने के लिए आमंत्रित करें। उसके अगले रोज रविवार की आधी रात को निर्वस्त्र स्नान करें। धुले हुए कपडे पहनें। धूप दीप दिखाकर जड़ की पूजा करें। फिर उसे पीड़ित व्यक्ति के औरत होने पर उसकी बायीं या पुरुष होने की स्थिति में उसकी दायीं भुजा में ताबीज की तरह बांध दें। बांधने के लिए काले डोरे का प्रयोग करें। बांधते समय गायत्री मंत्र का 11 बार जाप करें। बहुत ही लोकप्रिय मंत्र है- ऊँ भुर्भव स्व तत्स वितुर्रवरेण्यं भर्गो देवस्य धी मही धीयो यो न प्रचोदयात स्वाहा!!
यह वैसे पीडित पर किया जा सकता है, जो बार-बार प्रेत बाधा का शिकार हो जता है। टोटका घोड़े के खुर की नख से करें। उसे अश्विनी नक्षत्र में किसी भी मंगलवार को घर लाएं। उसे पीडित के सामने आग में जलाकर धुनी दें। इससे इस से भूत-प्रेत की बाधा दूर होती है। इस दौरान हनुमान चालिसा का पाठ 11 बार जाप करें।
मंगलवार या शनिवार के दिन काले धतूरे की जड़ पीड़ित व्यक्ति के दाहिनी बांह पर बांध दें। यदि वह स्त्री है तो धतूरे की जड़ उसकी बाईं बांह पर बांधे। इस दौरान ग्यारह बार हनुमान चालिसा का पाठ अवश्य पढें।
उड़द की दाल से से शनिवार के दिन दही बडे बनाएं। उन्हें विषम संख्या में लेकर पीड़ित के ऊपर से उसार दें। बाद में उसे शाम या सुबह के समय काले कुत्ते को खिला दें। ध्यान रखें वह काला कुत्ता पालतू नहीं और किसी शनिमंदिर के आसपास भटकता हुआ मिल जाए।
भूत भगाने का बहुत ही आसान तरीका है। सवा मीटर लाल कपड़ा, चाँदी का एक रुपया, एक किग्रा चावल तथा एक किग्रा तिल किसी बर्तन में रखकर पीड़ित के ऊपर से उसार दें। बर्तन को किसी नदी के किनारे रख दें। इसका असर अगले रोज से दिख जाएगा।
इस टोटके के प्रयोग से नवविवाहिता या गर्भवती औरत के भूत-प्रेत की बाधा दूर की जाती है। चांदी की छोटी सी गुड़िया बनवाएं। उसे जौहरी के यहां से सोमवार के रोज शाम तक घर ले आएं। अगले रोज मंगलवार की रात के समय एक किग्रा चावल, 250ग्राम चीनी, लाल कपड़ा तथा एक नारियल के साथ गुड़िया से पीड़ित के ऊपर से सात बार उसार दें। उसके बाद 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करें। और फिर सभी वस्तुएं रात के समय श्मशान में रख आएं।
भूत की चपेट में आए व्यक्ति के गले में गायत्री मंत्र के 10हजार बार जाप से सिद्ध रूद्राक्ष या ऊँ का लाॅकेट गले में पहना दें। सिर पर चंदन केसर का तिलक लगाएं। इन्हें घर के दरवाजे पर भी लटकाया जा सकता है।

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