श्रापित दोष के प्रभाव और उपाय

श्रापित दोष के प्रभाव और उपाय


बहुत सारे लोग अपने जीवन में कैरियर, परिवार, वैवाहिक जीवन, व्यवसाय जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कठिनाइयों का सामना करते है। कई बार उन्हें ऐसी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है जो सीधे उनसे सम्बंधित नहीं होती है। यह आपकी जन्म कुंडली में शनि राहु श्रापित दोष की मौजूदगी के कारण हो सकता है। यह एक बेहद अशुभ दोष माना जाता है जिसकी वजह से व्यक्ति को कई कठिनाइयों का सामना कर पड़ता है।

किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के किसी भी घर में राहु और शनि के संयोजन में शनि राहु श्रापित दोष का निर्माण होता है। इस खतरनाक दोष के कारण, उस व्यक्ति के लिए जीवन आराम के साथ बिताना मुश्किल हो जाता है। इस दोष के कारण पिछले जन्मों के बुरे कर्म होते है और यदि व्यक्ति इस के प्रभावों को दूर करने के लिए कुछ उपाय नहीं अपनाता है तो यह उसके परिवार में कई पीढ़ियों तक भी जारी रख सकता है।

कुछ ज्योतिषी शनि और राहु के एक दूसरे के पक्ष में होने को भी शनि राहु श्रापित दोष का कारण मानते है। हालांकि व्यक्ति उसकी कुंडली में राहु और शनि के संयोजन से प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकता है लेकिन साथ ही यह उसके दुर्भाग्य को बढ़ा सकता है जिसके कारण वह सफलता का आनंद नहीं उठा सकता है। किसी व्यक्ति की कुंडली में उपस्थित यह दोष अन्य शुभ ग्रहों के सकारात्मक प्रभावों को खत्म कर सकता है।

अगर राहु और शनि के संयोजन कुंडली के पहले, चौथे, सातवीं, आठवीं या बारहवें घर में है तो इस दोष के नकारात्मक प्रभाव बहुत अधिक होते है और इस दोष का निर्माण तीसरे, छठे या ग्यारहवें घर में होता है तो इस दोष के नकारात्मक प्रभाव कुछ कम हो सकते है।

शनि राहु श्रापित दोष के प्रभाव –
इस दोष के कारण, जन्मकुंडली के मिलने के बावजूद तलाक की संभावना या जीवनसाथी की मृत्यु हो सकती है। दोष के प्रभाव की वजह से परिवार में बच्चा अक्सर बीमार पड़ सकता है। परिवार में झगड़े और असामंजस्य की स्थिति हो सकती है और व्यक्ति को शिक्षा और कैरियर में समस्याएं हो सकती है।

शनि राहु श्रापित दोष क दूर करने के उपाय –
यहाँ इस दोष से छुटकारा पाने के कुछ उपाय दिए गए है।

  1. इस दोष से छुटकारा पाने का सबसे पहला उपाय शनि राहु श्रापित दोष निवारण पूजा है। इस पूजा को करने के तरीकों लिए आप एक ज्योतिषी से सुझाव ले सकते है।
  2. रोजाना सुबह नहाने के बाद शनि और राहु बीज मंत्र का 108 बार जप करें।

शनि के लिए बीज मंत्र – ॐ प्रांग प्रींग प्रॉन्ग सह शनिश्चराय नमः

राहु के लिए बीज मंत्र – ॐ भ्रान्ग भरीँग भृंग सह राहवे नमः

हर सोमवार को शिवलिंग पर कच्चा दूध, पानी और काले मसूर चढ़ाना इस दोष के निवारण में उपयोगी साबित हो सकता है।

  1. हर शनिवार को मछली और गायों को पके हुए चावल और घी खिलाएं।

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